MP News: प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र पर विवाद खत्म, हाई लेवल समिति ने जांच के बाद बताया वैध

MP News: प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र पर विवाद खत्म, हाई लेवल समिति ने जांच के बाद बताया वैध

MP News: प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाणपत्र पर विवाद खत्म, हाई लेवल समिति ने जांच के बाद बताया वैध

MP News: मध्यप्रदेश सरकार की मंत्री प्रतिमा बागरी को उनके जाति प्रमाणपत्र विवाद में बड़ी राहत मिली है. हाई लेवल जाति जांच समिति ने विस्तृत जांच के बाद उनके अनुसूचित जाति (बागरी) प्रमाणपत्र को वैध माना है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जांच के दौरान ऐसा कोई विश्वसनीय दस्तावेज या साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि प्रतिमा बागरी या उनका परिवार राजपूत समुदाय से संबंधित है.

पुराने सरकारी रिकॉर्ड बने सबसे बड़ा आधार

समिति ने वर्ष 1950 से लेकर वर्तमान तक उपलब्ध राजस्व अभिलेख, परिवार की वंशावली, पूर्वजों के रिकॉर्ड, स्कूल दस्तावेज, जाति प्रमाणपत्र, निर्वाचन रिकॉर्ड और अन्य शासकीय अभिलेखों की जांच की. सभी दस्तावेजों में परिवार की जाति बागरी दर्ज मिली. समिति ने कहा कि इतने लंबे समय से लगातार एक जैसे सरकारी रिकॉर्ड मौजूद हैं और इन्हें खारिज करने वाला कोई विश्वसनीय दस्तावेज सामने नहीं आया.

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राजपूत होने का दावा साबित नहीं हुआ

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रतिमा बागरी का परिवार मूल रूप से राजपूत समुदाय से है और बाद में अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवाया गया. लेकिन जांच के दौरान ऐसा कोई राजस्व रिकॉर्ड, वंशावली, जन्म रिकॉर्ड, शैक्षणिक दस्तावेज या अन्य सरकारी अभिलेख नहीं मिला, जिसमें परिवार को राजपूत बताया गया हो, समिति ने स्पष्ट किया कि केवल मौखिक आरोप या अनुमान को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना जा सकता.

1950 के रिकॉर्ड को माना सबसे मजबूत साक्ष्य

जांच समिति ने वर्ष 1950 के आसपास के राजस्व रिकॉर्ड और परिवार के पूर्वजों से जुड़े दस्तावेजों को सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना. समिति के अनुसार, आजादी के बाद के शुरुआती सरकारी रिकॉर्ड अधिक विश्वसनीय माने जाते हैं, क्योंकि उनमें बाद में बदलाव की संभावना कम होती है, समिति ने प्रतिमा बागरी के परिवार के अन्य सदस्यों के जाति प्रमाणपत्र, शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड, विभिन्न शासकीय विभागों के दस्तावेज और अन्य अभिलेखों का भी परीक्षण किया. सभी रिकॉर्ड में परिवार की जाति बागरी दर्ज पाई गई. किसी भी सरकारी दस्तावेज में परिवार को राजपूत समुदाय का नहीं बताया गया.

शिकायतकर्ता नहीं दे सके ठोस सबूत

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके. केवल आरोप लगाए गए, लेकिन उन्हें साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया, वहीं, सरकारी अभिलेख लगातार एक ही तथ्य की पुष्टि करते रहे कि प्रतिमा बागरी का परिवार बागरी समुदाय से संबंधित है.

हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई विस्तृत जांच

मामले में न्यायालय के निर्देश के बाद हाई लेवल जाति जांच समिति ने विस्तृत जांच की. समिति ने संबंधित विभागों से रिकॉर्ड मंगवाए, दस्तावेजों का मिलान किया, परिवार की वंशावली की जांच की और विभिन्न स्तरों पर तथ्यों का सत्यापन कराया, पूरी जांच के बाद समिति ने निष्कर्ष निकाला कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है और उसे निरस्त करने का कोई आधार नहीं बनता. इसके साथ ही जाति प्रमाणपत्र को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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