MP News: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा हमला, 6 राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग
MP News: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. केजरीवाल ने मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को तत्काल रद्द कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है.
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की
केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को मनमाने और असंवैधानिक तरीके से अकेले चलाने का आरोप लगाया. उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की. केजरीवाल ने दावा किया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना ही एकतरफा आदेश और आधिकारिक पत्र जारी किए जा रहे हैं.
SIR को रद्द करने और 13 करोड़ नामों पर सवाल
केजरीवाल ने 2025 में मध्य प्रदेश समेत 12 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू की गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को तुरंत निरस्त करने की मांग की. मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि SIR के माध्यम से देशभर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. उन्होंने पिछले तीन वर्षों में मतदाता सूची में किए गए सभी संशोधनों को रद्द कर पुरानी वोटर लिस्ट बहाल करने की वकालत की.
मतभेद और Form-6 विवाद का उठाया मुद्दा
अरविंद केजरीवाल ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लिखित आपत्तियां जताई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘Form-6’ में असंवैधानिक सवाल जोड़कर और केंद्रीय सॉफ्टवेयर ‘ECINet’ के जरिए स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों (ERO) के अधिकार छीनकर वोटर लिस्ट का नियंत्रण दिल्ली से चलाया जा रहा है.
फैसले सर्वसम्मति से, विचार-विमर्श सामान्य प्रक्रिया
अरविंद केजरीवाल और विपक्षी दलों के इन तीखे आरोपों पर चुनाव आयोग ने भी आधिकारिक सफाई दी है. निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि संस्था के भीतर किसी मुद्दे पर अलग-अलग राय या आंतरिक टिप्पणियां होना सामान्य संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है. आयोग ने जोर देकर कहा कि पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी नीतिगत फैसले पूरे आयोग (पूर्ण आयोग) की सर्वसम्मति से ही पास किए गए हैं और केवल कुछ आंतरिक पत्रों के आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाना गलत है.
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Author: Vindhya Times
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