MP News: भोपाल में दूषित पेयजल को लेकर बड़ा दावा, गैस पीड़ित संगठनों ने 70% पानी के नमूने बताए संक्रमित

MP News: भोपाल में दूषित पेयजल को लेकर बड़ा दावा, गैस पीड़ित संगठनों ने 70% पानी के नमूने बताए संक्रमित

MP News: भोपाल में दूषित पेयजल को लेकर बड़ा दावा, गैस पीड़ित संगठनों ने 70% पानी के नमूने बताए संक्रमित

MP News: भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में सप्लाई किए जा रहे पेयजल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. संगठनों का दावा है कि कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के इलाकों में सीवेज से दूषित पानी लोगों तक पहुंच रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्थिति पैदा हो सकती है.

70 प्रतिशत नमूनों में मिला फीकल कोलीफॉर्म

संगठनों ने प्रभावित क्षेत्रों से पेयजल के नमूने एकत्र कर जांच कराई और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की. उनके अनुसार, जांच किए गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, जो मल से होने वाले प्रदूषण का संकेत माना जाता है. दावा किया गया कि 30 बस्तियों से लिए गए 63 नमूनों में से 43 नमूने दूषित मिले.

तालाब और डैम के पानी पर भी सवाल

भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने दावा किया कि बड़ा तालाब से सप्लाई किए गए पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने और कोलार डैम से सप्लाई किए गए 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में दूषित पाए गए. उनका कहना है कि इससे कई इलाकों में लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है.

बीमारियां बढ़ने का आरोप

संगठनों का आरोप है कि दूषित पानी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. उनका कहना है कि कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों के बावजूद सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था पूरी नहीं होने का आरोप लगाया.

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को जल्द पूरा किया जाना चाहिए तथा पेयजल की गुणवत्ता की नियमित और स्वतंत्र निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए. फिलहाल इन आरोपों पर भोपाल नगर निगम की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

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Author: Vindhya Times

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