शारदीय नवरात्र 2026: शारदीय नवरात्र पर गूंजेगी चंडी माई की महिमा, जानिए कुरुद के इस प्राचीन मंदिर का रहस्य और परंपराएं

शारदीय नवरात्र 2026: शारदीय नवरात्र पर गूंजेगी चंडी माई की महिमा, जानिए कुरुद के इस प्राचीन मंदिर का रहस्य और परंपराएं

शारदीय नवरात्र 2026: शारदीय नवरात्र पर गूंजेगी चंडी माई की महिमा, जानिए कुरुद के इस प्राचीन मंदिर का रहस्य और परंपराएं

शारदीय नवरात्र2026: शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही छत्तीसगढ़ के कुरुद स्थित चंडी माई के दरबार में नौ दिनों तक भक्ति और उल्लास का माहौल रहता है, स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां की आस्था करीब 1,000 वर्ष पुरानी है, हालांकि हाल के दशकों में मंदिर को एक भव्य स्वरूप दिया गया है, लेकिन गर्भगृह में विराजित देवी की मूल प्रतिमा और पारंपरिक पूजा पद्धतियां आज भी श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बनी हुई हैं.

The Abode of Chandi Mai

आदिशक्ति योगमाया के रूप में माता की पूजा

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मां चंडी को आदिशक्ति योगमाया का स्वरूप माना जाता है, भक्त अपने किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत माता के दर्शन और आशीर्वाद से करते हैं, जहाँ नवविवाहित जोड़े सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए पहुंचते हैं, वहीं अन्य भक्त संतान प्राप्ति, व्यापार में उन्नति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगने के लिए दूर-दूर से इस दरबार में हाजिरी लगाते हैं.

ऐतिहासिक परंपराएं और बांका बाई से जुड़ा इतिहास

कुरुद रियासत की जमींदार बांका बाई के कार्यकाल से इस मंदिर की गहरी धार्मिक प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है, जहाँ विजयादशमी सहित सभी प्रमुख पर्वों पर उनके स्मारक चबूतरे पर विशेष पूजा होती है, वहीं मंदिर के प्रथम पुजारी माने जाने वाले आदिवासी बीरसिंह गोड़ से जवारा उत्सव की प्राचीन परंपरा जुड़ी है, और नवरात्र के दौरान उनकी जवारा यात्रा व देवस्थान पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं.

चंडी माई का दरबार

12 फीट गहरी रहस्यमयी बावड़ी का इतिहास

मंदिर की पूर्व दिशा में माता पुरैना तालाब के पास करीब 12 फीट गहरी एक सीढ़ीदार प्राचीन बावड़ी स्थित है, कठोर मुरूम चट्टानों के बीच बनाई गई इस अनोखी संरचना का निर्माण कब और किसने कराया था, इसका कोई भी प्रामाणिक विवरण आज तक उपलब्ध नहीं है, स्थानीय स्तर पर खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष मिलने की बातें कही जाती हैं, और पुरातत्व विभाग का वैज्ञानिक सर्वेक्षण इसके निर्माणकाल से जुड़े रहस्यों से पर्दा उठा सकता है.

क्वांर और चैत्र नवरात्र में उमड़ती है भारी भीड़

क्वांर और चैत्र नवरात्र के दोनों ही पावन अवसरों पर इस मंदिर में हजारों मनोकामना ज्योत प्रज्ज्वलित किए जाते हैं, इन नौ दिनों में पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, सुंदर फूलों और तोरण-पताकाओं से भव्य तरीके से सजाया जाता है, जहाँ माता की सेवा में लगातार जसगीत और विशेष पूजा-अर्चना का दौर चलता है, और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु जलेश्वर महादेव तथा भैरव बाबा के देवस्थान के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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