Rewa News: रीवा नगर निगम में कांग्रेस पार्षदों का महापौर के खिलाफ खुला विद्रोह
Rewa News: रीवा नगर निगम की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया जब मंगलवार शाम को आयोजित परिषद की बैठक का कांग्रेस के ही 16 में से 9 पार्षदों ने सामूहिक बहिष्कार कर दिया। महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी के पार्षदों का यह खुला विद्रोह शहर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्षदों का आरोप है कि परिषद में लोकतंत्र खत्म हो चुका है और जनहित के मुद्दों को जानबूझकर दबाया जा रहा है, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं।
महापौर के खिलाफ कांग्रेस पार्षदों का खुला विद्रोह
नगर निगम की परिषद बैठक शुरू होते ही कांग्रेस खेमे में मची आंतरिक कलह सतह पर आ गई। महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब उनकी पार्टी के बहुमत पार्षदों ने बैठक से दूरी बना ली। नाराज पार्षदों का तर्क है कि नगर निगम प्रशासन और महापौर उनकी बातों को तवज्जो नहीं देते हैं। पार्षदों ने स्पष्ट रूप से कहा कि परिषद की बैठकों में उनकी भूमिका महज एक ‘रबर स्टैम्प’ की तरह रह गई है, जहाँ उनकी उपस्थिति तो दर्ज की जाती है लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।

पुराने विवादों की पुनरावृत्ति
बहिष्कार करने वाले पार्षदों का आरोप है कि जब भी वे जनहित या अपने वार्ड की समस्याओं को परिषद के पटल पर रखते हैं, तो उन पर वरिष्ठ नेताओं द्वारा दबाव बनाया जाता है। चर्चा के समय को सीमित कर देना और विपक्ष की तरह व्यवहार करना अब आम बात हो गई है। गौरतलब है कि रीवा नगर निगम में विवादों का सिलसिला पुराना है; कुछ समय पूर्व भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोला था। उस वक्त कांग्रेस के समर्थन से स्थिति संभली थी, लेकिन अब कांग्रेस का अपना ही किला ढहता नजर आ रहा है।
पार्षदों ने लगाए गंभीर आरोप
पार्षद अर्चना मिश्रा ने परिषद की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए इसे एक “रंगमंच” की संज्ञा दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी बैठक महापौर और अध्यक्ष की निजी पसंद-नापसंद के आधार पर संचालित होती है। एजेंडा तय करने से लेकर चर्चा की दिशा मोड़ने तक, सब कुछ पहले से स्क्रिप्टेड होता है। अर्चना मिश्रा का कहना है कि पार्षदों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए बात करने का लोकतांत्रिक अधिकार भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे जनता के बीच उनकी छवि धूमिल हो रही है।
महिला पार्षदों के साथ भेदभाव और निलंबन का मुद्दा
वार्ड क्रमांक 13 की निर्दलीय पार्षद नम्रता संजय सिंह ने नगर निगम के भीतर चल रहे भेदभाव को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वे विरोध दर्ज कराती हैं, उन्हें नियम-कायदों का हवाला देकर बार-बार सदन से निलंबित कर बाहर कर दिया जाता है। नम्रता सिंह ने इसे महिला जनप्रतिनिधि का अपमान बताते हुए कहा कि परिषद में उनके साथ लैंगिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। इस अपमानजनक व्यवहार के कारण निर्दलीय पार्षदों में भी भारी रोष व्याप्त है।
आगामी चुनौतियां और गहराता राजनीतिक संकट
रीवा नगर निगम के भीतर उपजा यह असंतोष आने वाले दिनों में महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। पार्टी के भीतर की यह गुटबाजी न केवल विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए भी कांग्रेस की स्थिति कमजोर कर सकती है। यदि वरिष्ठ नेतृत्व ने समय रहते हस्तक्षेप कर नाराज पार्षदों को नहीं मनाया, तो यह खींचतान परिषद के कामकाज को पूरी तरह ठप कर सकती है। फिलहाल, शहर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि महापौर इस असंतोष को कैसे शांत करते हैं।
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Author: Vindhya Times
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