CG News: राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक समागम 2026: लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता का भव्य उत्सव

CG News: राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक समागम 2026: लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता का भव्य उत्सव

CG News: राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक समागम 2026: लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता का भव्य उत्सव

CG News: नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किला मैदान इस बार जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक एकता के अद्भुत दृश्य का साक्षी बना। यहां आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक समागम 2026 में देशभर से आए हजारों जनजातीय प्रतिनिधियों ने अपनी परंपराओं, कला और विरासत का भव्य प्रदर्शन किया, यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष को समर्पित रहा, जिसमें जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका और सांस्कृतिक योगदान को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।

दिल्ली के लाल किला मैदान में जनजातीय अस्मिता का महाकुंभ, बिरसा मुंडा की  150वीं जयंती पर जुटे देशभर के हजारों प्रतिनिधि - birsa munda 150th national  tribal ...

सीएम साय का प्रेरक संबोधन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनजातीय समाज को भारत की सांस्कृतिक आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि जनजातीय जीवन प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने का सर्वोत्तम उदाहरण है, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आज के समय में जब पूरी दुनिया पर्यावरणीय संकट से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन शैली हमें टिकाऊ विकास का मार्ग दिखाती है।

नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक  समागम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी ...

जनजातीय समाज की भूमिका

सीएम साय ने अपने संबोधन में कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा में जनजातीय समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। यह समाज सदियों से पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार रहा है, उन्होंने जनजातीय परंपराओं को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, मुख्यमंत्री ने गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं को संरक्षित करने और शिक्षा प्रणाली में शामिल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति और पहचान की आत्मा होती है।

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छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत

सीएम साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ की लगभग 44 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र है, जो जनजातीय जीवन और संस्कृति का आधार है, राज्य में आयोजित ‘आदि परब’, ‘बस्तर पंडुम’ और ‘बस्तर ओलंपिक’ जैसे कार्यक्रम जनजातीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच प्रदान कर रहे हैं, कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। मांदर, ढोल और लोकधुनों की गूंज से पूरा लाल किला मैदान जनजातीय रंगों में रंग गया।

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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