CG News: 936 वर्षों बाद भोरमदेव मंदिर में होगा दुर्लभ महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम् अनुष्ठान, केरल के वैदिक आचार्य करेंगे विशेष पूजन

CG News: 936 वर्षों बाद भोरमदेव मंदिर में होगा दुर्लभ महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम् अनुष्ठान, केरल के वैदिक आचार्य करेंगे विशेष पूजन

CG News: 936 वर्षों बाद भोरमदेव मंदिर में होगा दुर्लभ महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम् अनुष्ठान, केरल के वैदिक आचार्य करेंगे विशेष पूजन

CG News: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है. करीब 936 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यहां एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा. यह पांच दिवसीय आयोजन 25 जुलाई से 29 जुलाई तक चलेगा, जिसमें देशभर के श्रद्धालुओं के साथ केरल से आने वाले वैदिक आचार्य शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना संपन्न करेंगे, भोरमदेव मंदिर में आयोजित होने वाला महाचतुर शुद्धि सहस्र कलशम् अनुष्ठान मंदिर की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्यक्रम माना जा रहा है. लंबे समय बाद होने वाला यह आयोजन मंदिर की आध्यात्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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देवशक्ति के पुनर्जागरण की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समय-समय पर विशेष वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से मंदिरों की आध्यात्मिक ऊर्जा को पुनः जागृत करने की परंपरा रही है. इसी उद्देश्य से इस आयोजन में हाटकेश्वर महादेव की विशेष पूजा, मंदिर परिसर की शुद्धि, क्षेत्रपाल देवताओं का सम्मान और धार्मिक विधानों का पालन किया जाएगा, इस पांच दिवसीय आयोजन में 15 से 20 वैदिक आचार्य शामिल होंगे. उनके मार्गदर्शन में गणपति होम, महामृत्युंजय होम, रुद्राभिषेक, सहस्र कलशाभिषेक, श्रीचक्र पूजा, वास्तु होम, सुदर्शन होम, पंचगव्य अभिषेक और क्षीराभिषेक सहित 30 से अधिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे. श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आध्यात्मिक अनुभव का विशेष अवसर माना जा रहा है.

जिला प्रशासन ने शुरू की तैयारियां

आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं. बाहर से आने वाले वैदिक आचार्यों, श्रद्धालुओं और अतिथियों के ठहरने, सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन और आयोजन समिति संयुक्त रूप से तैयारियों में जुटी हुई है, ताकि कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सके, कबीरधाम जिले की पहाड़ियों और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित भोरमदेव मंदिर अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और आकर्षक शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है. भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण लगभग 11वीं शताब्दी में माना जाता है. इसकी वास्तुकला और पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियों के कारण इसे “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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