Rewa News: 10 साल बाद फिर डूबा रीवा, कागजों में दबकर रह गई बाढ़ से बचाव की योजना

Rewa News: 10 साल बाद फिर डूबा रीवा, कागजों में दबकर रह गई बाढ़ से बचाव की योजना

Rewa News: 10 साल बाद फिर डूबा रीवा, कागजों में दबकर रह गई बाढ़ से बचाव की योजना

Rewa News: रीवा में बाढ़ कोई पहली बार नहीं आई है. करीब 10 साल पहले 19 अगस्त 2016 को भी शहर और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने थे. एक रात की तेज बारिश के बाद बीहर और बिछिया नदियां उफान पर आ गई थीं और नदी का पानी बैक होने से कई मोहल्ले जलमग्न हो गए थे. उस समय भी बाढ़ से निपटने के लिए स्थायी समाधान की जरूरत महसूस हुई थी, लेकिन एक दशक बाद फिर वही तस्वीर सामने है.

इस बार हालात ज्यादा गंभीर

10 साल बाद रीवा में एक बार फिर भारी बारिश के कारण हालात बिगड़ गए हैं. बीहर और बिछिया समेत कई नदियां उफान पर हैं, वहीं शहर की कॉलोनियों, सड़कों और निचले इलाकों में पानी भर गया है. गांवों का संपर्क टूटने के साथ शहर के कई रास्ते भी प्रभावित हुए हैं. नदी का पानी शहर की ओर बढ़ने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है. मौजूदा हालात 2016 की बाढ़ से भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं.

हरिजन-आदिवासी बस्ती के घरों और दुकानों में घुसा पानी।

बाढ़ रोकने की योजनाओं पर नहीं हुआ काम

बाढ़ से शहर को बचाने के लिए पहले भी योजनाएं बनाने की बात सामने आई थी. बताया गया कि नदी किनारे के इलाकों में जलभराव और अतिक्रमण को देखते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए थे. जल संसाधन विभाग की ओर से प्रोजेक्ट तैयार कर अधिकारियों के सामने रखा भी गया, लेकिन अनुमानित लागत अधिक होने के बाद मामला आगे नहीं बढ़ सका. सवाल यह है कि अगर 10 साल पहले सामने आई समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो अब इसका खामियाजा आम लोगों को क्यों भुगतना पड़ रहा है.

नदी किनारे अतिक्रमण पर भी उठे सवाल

रीवा में नदी किनारे अतिक्रमण का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में रहा है. बाढ़ के दौरान प्रशासनिक बैठकों में नदी के किनारे किए गए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आती रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई कितनी हुई, यह बड़ा सवाल है. करहिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में नदी के किनारे प्लॉटिंग और निर्माण को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में बाढ़ के दौरान नदी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट को लेकर लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं.

अब स्थायी समाधान की जरूरत

रीवा में हर बड़ी बारिश के बाद जलभराव और बाढ़ का संकट सामने आना बताता है कि सिर्फ राहत और बचाव की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. शहर को बाढ़ से बचाने के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव, जल निकासी व्यवस्था, अतिक्रमण और संवेदनशील इलाकों की वैज्ञानिक तरीके से समीक्षा जरूरी है. 2016 के बाद करीब एक दशक का समय मिला, लेकिन अगर इस दौरान स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो मौजूदा बाढ़ प्रशासनिक तैयारियों और पुरानी योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है. अब जरूरत है कि कागजों से बाहर निकलकर ऐसी ठोस कार्ययोजना लागू हो, जिससे रीवा को हर साल बाढ़ के खतरे से न जूझना पड़े.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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