MP News: मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी का खुलासा, 708 हितग्राहियों को ग्रामीण और शहरी दोनों योजनाओं का लाभ
MP News: गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) मध्य प्रदेश में गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के घेरे में आ गई है। प्रदेश में 708 ऐसे लाभार्थी चिन्हित किए गए हैं जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी दोनों का लाभ मिल गया, यानी एक ही व्यक्ति के नाम पर दो अलग-अलग आवास स्वीकृत कर दिए गए, जबकि नियमों के अनुसार किसी पात्र व्यक्ति को एक ही आवास योजना का लाभ मिलना चाहिए।
42 जिलों में मिले दोहरे लाभार्थी
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के लगभग 42 जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। सबसे अधिक दोहरे लाभार्थी निम्न जिलों में पाए गए—
• इंदौर – 89 मामले
• सागर – 68 मामले
• धार – 64 मामले
• जबलपुर – 47 मामले
• विदिशा – 42 मामले
वहीं सतना जिले में भी 11 लाभार्थियों को दोनों योजनाओं का लाभ मिलने की पुष्टि हुई है।

सतना में सामने आए चौंकाने वाले मामले
सतना जिले में लाभार्थियों के डेटा मिलान के दौरान पता चला कि 11 लोगों को ग्रामीण और शहरी दोनों योजनाओं के तहत मकान स्वीकृत हुए।
इनमें:
• 8 लाभार्थियों के दोनों मकान पूर्ण हो चुके हैं।
• 1 लाभार्थी का ग्रामीण आवास पूरा हो चुका है जबकि शहरी आवास निर्माणाधीन है।
• 2 मामलों में शहरी आवास पूर्ण और ग्रामीण आवास निर्माणाधीन पाया गया।
अमिलिया पंचायत का मामला
नागौद क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमिलिया में एक लाभार्थी को पहले शहरी आवास योजना के तहत वर्ष 2017 में मकान स्वीकृत हुआ, इसके बाद वर्ष 2022 में उसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के तहत भी दूसरा आवास स्वीकृत कर दिया गया। रिकॉर्ड के अनुसार दोनों मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है, रामपुर बाघेलान क्षेत्र की ग्राम पंचायत सगौनी में भी इसी तरह का मामला सामने आया है, जहां एक लाभार्थी को पहले शहरी आवास और बाद में ग्रामीण आवास योजना का लाभ दिया गया, इससे योजना के सत्यापन तंत्र और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिस्टम की खामी या मिलीभगत?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दोनों योजनाओं में आधार नंबर, बैंक खाते, मोबाइल नंबर और बहुस्तरीय सत्यापन प्रक्रिया लागू है, तब एक ही व्यक्ति दो बार पात्र कैसे घोषित हो गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे दो संभावनाएं हो सकती हैं—
• लाभार्थियों द्वारा जानकारी छिपाना।
• स्थानीय स्तर पर सत्यापन और जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही।
यदि आधार आधारित सत्यापन पूरी तरह प्रभावी होता तो इस तरह की दोहरी स्वीकृति संभव नहीं होनी चाहिए थी।
वसूली और कार्रवाई की तैयारी
शैलेन्द्र सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाएगा, यदि किसी लाभार्थी द्वारा दोहरा लाभ लेने की पुष्टि होती है, तो उससे राशि की वसूली की जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी, एक ओर हजारों पात्र परिवार अभी भी आवास योजना के लाभ का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों लोगों को दो-दो मकान मिलने का मामला योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर जांच और कार्रवाई पर टिकी है कि दोषियों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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Author: Vindhya Times
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