Rewa News: रीवा में सब्जियों की महंगाई से बिगड़ा रसोई का बजट, प्याज 80 और लहसुन 150 रुपए किलो तक पहुंचा
Rewa News: रीवा में सब्जियों की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है. प्याज, अदरक और लहसुन के साथ हरी सब्जियों के दाम भी ऊंचे बने हुए हैं. मौसम अनुकूल होने के बावजूद लोगों को सब्जी बाजार में महंगाई से राहत नहीं मिल रही है. स्थानीय मंडियों में पर्याप्त मात्रा में सब्जियां नहीं पहुंचने के कारण दूसरे शहरों और राज्यों से आपूर्ति करनी पड़ रही है, जिसका असर खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है.

स्थानीय मंडियों में आवक कम
थोक सब्जी कारोबारियों के अनुसार, इन दिनों रीवा की मंडियों में सब्जियों की आवक मांग के मुकाबले कम है. टमाटर की आपूर्ति के लिए बेंगलुरु पर निर्भरता बनी हुई है, जबकि नासिक से प्याज की नई फसल पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंची है. फिलहाल बाजार में कोल्ड स्टोरेज में रखा पुराना प्याज बेचा जा रहा है. व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आवक बढ़ने और बाहरी मंडियों से आपूर्ति सामान्य होने पर ही कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना है.

प्याज, अदरक और लहसुन के भाव ने बढ़ाई परेशानी
रीवा के बाजारों में प्याज 70 से 80 रुपए किलो, अदरक 80 से 150 रुपए और लहसुन 120 से 150 रुपए किलो तक बिक रहा है. रोजाना भोजन में इस्तेमाल होने वाली इन चीजों की ऊंची कीमतों ने रसोई का खर्च बढ़ा दिया है. इसके अलावा परवल 40 से 50 रुपए, गाजर 30 से 40 रुपए, पालक 40 से 50 रुपए और मेथी 70 से 80 रुपए किलो के भाव पर उपलब्ध है.

टमाटर 50 रुपए किलो, आलू और गोभी के दाम भी बरकरार
अन्य सब्जियों की बात करें तो टमाटर 40 से 50 रुपए किलो, गोभी 30 से 35 रुपए, आलू 20 से 25 रुपए और लौकी 35 से 40 रुपए किलो बिक रही है. लाल भाजी की कीमत 20 से 30 रुपए किलो के बीच है. पिछले सप्ताह के मुकाबले कुछ सब्जियों के दामों में 10 से 20 रुपए प्रति किलो तक की कमी जरूर आई है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं. ऐसे में आम उपभोक्ताओं को सब्जियों की खरीदारी पर पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है.

नई फसल आने तक कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद कम
थोक कारोबारियों के मुताबिक, प्याज की नई फसल बाजार में पहुंचने में लगभग एक महीने की देरी हो सकती है. इसके दिसंबर के अंत तक उपलब्ध होने की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं, नए आलू की आवक भी दिसंबर में शुरू होने की संभावना है. व्यापारियों का मानना है कि नई फसल की आपूर्ति बढ़ने के बाद ही कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. तब तक रीवा के उपभोक्ताओं को सब्जियों की खरीदारी के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.
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Author: Vindhya Times
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