Rewa News: रीवा में स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही पर कड़ा प्रहार, जानकारी न भेजने पर लिपिक सस्पेंड
Rewa News: मध्य प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे अनुकंपा नियुक्ति अभियान के बीच रीवा जिले के स्कूल शिक्षा विभाग में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला उजागर हुआ है, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 एवं अनुकंपा नियुक्ति कक्ष प्रभारी अखिलेश तिवारी द्वारा उच्च स्तर से मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी न भेजने के कारण विभाग की भारी फजीहत हुई, मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संभाग आयुक्त (कमिश्नर) के निर्देश पर संयुक्त संचालक (JD) लोक शिक्षण रीवा ने आरोपी लिपिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय रायपुर कर्चुलियान निर्धारित किया गया है.
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वंचित अभ्यर्थियों की सूची
उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 600 से अधिक लंबित फाइलों का निपटारा करते हुए पात्र अभ्यर्थियों को अनुकंपा नियुक्ति के आदेश सौंपे गए थे, इसी कड़ी में प्रमोशन से रिक्त हुए सहायक ग्रेड-3 के पदों पर रीवा जिले से भी करीब 30 अभ्यर्थियों की वरिष्ठता सूची के आधार पर नियुक्तियां दी गई थीं, इसके उपरांत लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल ने 25 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर प्रमाण पत्र मांगा था कि वरिष्ठता क्रम में कोई पात्र व्यक्ति अनुकंपा नियुक्ति से वंचित तो नहीं रह गया है, इस संबंध में बार-बार निर्देश देने के बावजूद शाखा प्रभारी अखिलेश तिवारी ने उच्च कार्यालय को रिपोर्ट प्रेषित नहीं की.
पात्र अभ्यर्थियों के हक पर मंडराया संकट
समय पर आवश्यक जानकारी और प्रमाण पत्र न भेजे जाने के कारण लोक शिक्षण संचालनालय का प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे जिले के कई पात्र अभ्यर्थियों के अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से वंचित रह जाने की गंभीर स्थिति निर्मित हो गई, इस घोर लापरवाही पर संभागायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए दोषी कर्मचारी पर त्वरित अनुशासनात्मक दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए, जिसके पालन में निलंबन की गाज गिरी.
पूर्व कलेक्टर के निरीक्षण में भी आई थी घपलेबाजी
निलंबित लिपिक अखिलेश तिवारी का विवादों और प्रशासनिक लापरवाहियों से पुराना नाता रहा है, तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जब डीईओ कार्यालय का औचक निरीक्षण और छापेमारी की थी, तब भी अखिलेश तिवारी की गंभीर खामियां पकड़ी गई थीं, निरीक्षण में शिक्षकों के एरियर व वेतन भुगतान की फाइलें बेवजह अटकाने और कई महत्वपूर्ण फाइलों को पेंडिंग रखने का खुलासा हुआ था, उस समय कलेक्टर ने भारी फटकार लगाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए थे, हालांकि तब वे केवल तबादले के सहारे बच निकले थे.
फर्जी वेंडर व अनुदान घोटाले में भी दर्ज है नाम
इतना ही नहीं, रीवा के बहुचर्चित 4.41 करोड़ रुपये के शासकीय अनुदान और सामग्री घोटाले में भी अखिलेश तिवारी का नाम प्रमुखता से शामिल रहा है, तत्कालीन कलेक्टर डॉ. इलैया राजा टी द्वारा कराई गई उच्चस्तरीय जांच में फर्जी वेंडर बनाकर परिजनों, परिचितों, कंप्यूटर सेंटरों और दुकानदारों के बैंक खातों में शासकीय राशि ट्रांसफर करने का खुलासा हुआ था, इस घोटाले में पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया था, जिसमें डीईओ ऑफिस के तत्कालीन लेखापाल अशोक शर्मा, शिक्षक विजय तिवारी के साथ सहायक ग्रेड-3 अखिलेश तिवारी की मुख्य संलिप्तता पाई गई थी.
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Author: Vindhya Times
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