CG News: 116 दिन बाद ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर, CBI-ED करेगी पूछताछ, जानिए पूरा मामला
CG News: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के मुख्य आरोपी और प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने गिरफ्तार कर लिया है. उसे ओमान में पकड़ा गया था और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 नवंबर को भारत लाया गया. इस कार्रवाई को महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच में अहम कदम माना जा रहा है.
116 दिन बाद ओमान से भारत पहुंचा सौरभ
CBI के मुताबिक, महादेव सट्टा नेटवर्क की जांच शुरू होने के बाद से ही सौरभ चंद्राकर फरार था. वह वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कथित तौर पर फर्जी पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और UAE से ओमान पहुंच गया, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के कथित फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट की जानकारी सामने आई थी. इस पासपोर्ट में उसकी तस्वीर थी, लेकिन नाम ‘अजंता मेंडिस’ दर्ज था, जो श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर अजन्ता मेंडिस के नाम से मिलता-जुलता है. पासपोर्ट में दर्ज जन्मतिथि भी उसके दूसरे दस्तावेजों से अलग बताई गई थी.

8 जुलाई को ओमान पुलिस ने किया गिरफ्तार
खुफिया जानकारी और इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर 8 जुलाई 2026 को ओमान की रॉयल पुलिस ने सौरभ चंद्राकर को गिरफ्तार किया था. इसके बाद CBI और ED ने भारत सरकार के माध्यम से ओमान को प्रत्यर्पण का औपचारिक प्रस्ताव भेजा. दोनों एजेंसियों ने मामले से जुड़े दस्तावेज और सबूत भी ओमान के अधिकारियों को सौंपे, सौरभ को भारत लाने की प्रक्रिया में CBI, ED, इंटरपोल और ओमान के अधिकारियों के बीच समन्वय किया गया. प्रत्यर्पण की मंजूरी मिलने के बाद CBI की टीम मस्कट पहुंची और 1 नवंबर को उसे भारत लेकर आई. CBI ने इस कार्रवाई में सहयोग के लिए ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस का आभार जताया.
रायपुर लाने की तैयारी
भारत पहुंचने के बाद सौरभ चंद्राकर का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, CBI की टीम पहले उसे दिल्ली की अदालत में पेश करेगी. वहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे रायपुर लाया जा सकता है, जहां स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया जाएगा. छत्तीसगढ़ सरकार ने महादेव ऐप से जुड़े 13 FIR की जांच CBI को सौंपी थी, सौरभ चंद्राकर के खिलाफ CBI दो मामलों में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. वहीं, प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है. अब भारत आने के बाद CBI उससे पहले पूछताछ कर सकती है. इसके बाद ED भी कानूनी प्रक्रिया के तहत रिमांड लेकर उससे सवाल-जवाब कर सकती है.

भारत आने से पहले जान का खतरा जताने का दावा
ओमान में हिरासत के दौरान सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर भारत की जेल में अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई थी. उसने अपने परिवार की सुरक्षा की मांग भी की थी. सौरभ का दावा था कि महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोग उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं. उसने पूछताछ के दौरान सुरक्षा देने और बिना दबाव के अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की थी.
नेटवर्क के राजनीतिक कनेक्शन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर ने ओमान में भारतीय जांच एजेंसियों को महादेव सट्टा नेटवर्क के कथित राजनीतिक संपर्कों, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की जानकारी देने की बात कही थी. उसने भारत आकर जांच एजेंसियों और अदालत में बयान देने की तैयारी जताई थी. इसके साथ ही उसने अपनी और परिवार की सुरक्षा तथा नेटवर्क से जुड़े लोगों से अलग रखने की मांग की थी.
देशभर में फैला था नेटवर्क
CBI की जांच के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में शामिल था, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था. इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था. जांच एजेंसी के अनुसार, सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से इस नेटवर्क को लाखों यूजर्स तक पहुंचाया था.
फ्रेंचाइजी की तरह बनाए गए थे पैनल और ब्रांच
जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी के कारोबार को बढ़ाने के लिए देशभर में फ्रेंचाइजी की तरह पैनल और ब्रांच बनाई गई थीं. इनके जरिए लोगों को ऑनलाइन सट्टेबाजी से जोड़ा जाता था और उनसे रकम जमा कराई जाती थी. CBI के मुताबिक, इस व्यवस्था के माध्यम से नेटवर्क का संचालन अलग-अलग जगहों से किया जा रहा था, जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम कई बैंक खातों में जमा कराई जाती थी. इसके बाद अलग-अलग लेनदेन के जरिए पैसों के स्रोत को छिपाने और हवाला के माध्यम से रकम विदेश भेजने का आरोप है. CBI की जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क को बिना रुकावट चलाने के लिए कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी.
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराओं में कार्रवाई
CBI ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, IPC की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है. वहीं, ED भारत और विदेश में स्थित कई संपत्तियों को अटैच कर चुकी है. अब सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेन-देन और कथित संरक्षण तंत्र से जुड़े पहलुओं की जांच की जाएगी, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने CBI को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि प्रोटेक्शन मनी किन-किन लोगों तक पहुंचती थी, इसका बड़ा खुलासा होगा. मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब जांच एजेंसियों की पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी.
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Author: Vindhya Times
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