MP News: मंत्री प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र विवाद, हाईकोर्ट ने जांच हाई लेवल कमेटी को सौंपी

MP News: मंत्री प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र विवाद, हाईकोर्ट ने जांच हाई लेवल कमेटी को सौंपी

MP News: मंत्री प्रतिमा बागरी जाति प्रमाण पत्र विवाद, हाईकोर्ट ने जांच हाई लेवल कमेटी को सौंपी

MP News: मध्यप्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र विवाद मामले में हाईकोर्ट ने सीधे जांच का आदेश देने के बजाय मामला हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी को सौंप दिया है। कोर्ट ने कमेटी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच कर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

60 दिन में तय करनी होगी वैधता

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कमेटी को 60 दिनों के भीतर यह तय करना होगा कि प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (SC) प्रमाण पत्र वैध है या नहीं। कमेटी को सभी पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देना अनिवार्य होगा।

मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में हाईकोर्ट का फैसला, कमेटी  करेगी जांच, 60 दिन में देगी रिपोर्ट

कांग्रेस ने उठाया मामला

भोपाल में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने प्रक्रिया के तहत जांच के दिए निर्देश

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि 31 मार्च 2025 को दिए गए आवेदन के आधार पर कमेटी पूरे मामले की जांच करेगी। राज्य सरकार की ओर से भी कोर्ट को आश्वासन दिया गया कि जांच नियमानुसार पूरी की जाएगी और निर्णय याचिकाकर्ता को सूचित किया जाएगा।

आरोप क्या हैं?

याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का आरोप है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से SC प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और इसी आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर मंत्री पद प्राप्त किया।

दस्तावेजों का हवाला

याचिका में 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, 2003 की राज्य स्तरीय छानबीन समिति के फैसले और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि ‘बागरी’ समुदाय SC श्रेणी में शामिल नहीं है।

आगे की प्रक्रिया

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी पक्ष 30 अप्रैल 2026 तक आदेश की प्रति कमेटी को भेजें। साथ ही यदि 30 जून 2026 तक कमेटी निर्णय नहीं लेती है, तो याचिकाकर्ता को याचिका पुनर्जीवित करने की स्वतंत्रता होगी, फिलहाल पूरा मामला हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी के पास भेज दिया गया है, जो सभी तथ्यों और दस्तावेजों की जांच कर अंतिम निर्णय लेगी।

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Author: Vindhya Times

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