MP News: MP में बेरोजगारी के आंकड़ों पर सवाल, 6 महीने में 8 लाख से ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार कम, रीवा सबसे ऊपर
MP News: मध्य प्रदेश में रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या को लेकर विधानसभा में पेश आंकड़ों ने नई चर्चा शुरू कर दी है. सरकार के अनुसार 30 जून 2026 तक रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 17 लाख 71 हजार 132 है. वहीं, फरवरी 2026 में विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक 31 दिसंबर 2025 तक यह संख्या 25 लाख 95 हजार 680 थी. यानी छह महीने के भीतर 8 लाख 24 हजार 548 पंजीकृत बेरोजगार कम दर्ज किए गए हैं.
विधानसभा में सरकार ने दी जानकारी
यह जानकारी कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के सवाल के जवाब में दी गई. कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार, गौतम टेटवाल ने बताया कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जॉब फेयर योजना और रोजगार पोर्टल के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. सरकार के मुताबिक 30 जून 2026 तक पोर्टल पर 17.71 लाख पंजीकृत बेरोजगार दर्ज हैं.
आंकड़ों में बड़े अंतर पर उठ रहे सवाल
विधानसभा में पेश दोनों जवाबों की तुलना करने पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या में बड़ा अंतर दिखाई देता है. इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर छह महीने में इतनी बड़ी संख्या कैसे कम हुई. हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह कमी रोजगार मिलने, पंजीकरण समाप्त होने, रिकॉर्ड अपडेट होने या किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण हुई है.
रीवा में सबसे ज्यादा पंजीकृत बेरोजगार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रीवा जिले में सबसे अधिक पंजीकृत बेरोजगार हैं. इसके बाद सागर, जबलपुर, सतना और छिंदवाड़ा का स्थान है. वहीं, पांढुर्णा जिला सबसे कम पंजीकृत बेरोजगारों वाला जिला बताया गया है, 31 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रोजगार पोर्टल पर ओबीसी वर्ग के 10 लाख से अधिक, सामान्य वर्ग के 6.51 लाख, अनुसूचित जाति वर्ग के 4.70 लाख और अनुसूचित जनजाति वर्ग के 4.18 लाख युवा पंजीकृत थे. हालांकि सरकार ने यह जानकारी नहीं दी कि छह महीने के दौरान किस वर्ग में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या कितनी कम हुई.
चर्चा का विषय बने सरकारी आंकड़े
सरकार का कहना है कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए जॉब फेयर और अन्य योजनाओं के जरिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, विधानसभा में पेश दो अलग-अलग अवधियों के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. सरकार ने अभी तक इस अंतर के कारणों का विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है.
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Author: Vindhya Times
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