Rewa News: रीवा में जमीन मुआवजे को लेकर किसान का जल सत्याग्रह, प्रशासन और परिवार के दावे आमने-सामने

Rewa News: रीवा में जमीन मुआवजे को लेकर किसान का जल सत्याग्रह, प्रशासन और परिवार के दावे आमने-सामने

Rewa News: रीवा में जमीन मुआवजे को लेकर किसान का जल सत्याग्रह, प्रशासन और परिवार के दावे आमने-सामने

Rewa News: रीवा की गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के बेला गांव में जमीन के मुआवजे को लेकर किसान देशराज मिश्रा का विरोध अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. करीब 72 घंटे तक पानी भरे गड्ढे में बैठकर प्रदर्शन करने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई. इसके बाद उन्हें संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज ICU में चल रहा है. किसान का विरोध हाई एक्सटेंशन विद्युत लाइन और टावर के लिए जमीन के इस्तेमाल से जुड़े मुआवजे को लेकर है.

Deshraj's health deteriorated after the 'Jal Satyagraha'.

परिवार ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप

देशराज मिश्रा और उनके परिवार की ओर से प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं. परिवार का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित तरीके से सुनवाई नहीं की गई और देशराज को बंधक जैसी स्थिति में रखा गया. उनका कहना है कि जमीन के इस्तेमाल के बदले उचित मुआवजा मिलने तक विरोध जारी रहेगा. फिलहाल किसान की हालत को लेकर परिवार की चिंता बढ़ी हुई है.

कलेक्टर ने बताया 80 हजार का मुआवजा

मामले में रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने परिवार के आरोपों को खारिज किया है. उनके अनुसार संबंधित जमीन गैर-कृषि और गैर-सिंचित श्रेणी में आती है. करीब 2800 वर्गफीट क्षेत्र में विद्युत टावर लगाए जाने की योजना है और शासन की निर्धारित व्यवस्था के मुताबिक कंपनी करीब 80 हजार रुपये का मुआवजा देने को तैयार है. वहीं किसान पक्ष की ओर से करीब 40 लाख रुपये की मांग किए जाने की बात प्रशासन ने कही है.

पूरे खेत के मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट

प्रशासन के मुताबिक हाई एक्सटेंशन लाइन के टावर के लिए इस्तेमाल होने वाले हिस्से के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने का प्रावधान है. कलेक्टर का कहना है कि टावर लगने के बाद भी भू-स्वामी बाकी जमीन का उपयोग कर सकता है, इसलिए पूरे खेत का मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है. प्रशासन का दावा है कि प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की गणना सरकारी नियमों के अनुसार की गई है.

अब समाधान पर टिकी नजर

कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली की हाई एक्सटेंशन लाइन का रूट किसी एक व्यक्ति की मांग पर मनमाने तरीके से बदला नहीं जा सकता. इसका निर्धारण तकनीकी मानकों के आधार पर किया जाता है. दूसरी ओर किसान पक्ष अपनी मांग पर कायम है. ऐसे में 80 हजार रुपये के प्रस्ताव और 40 लाख रुपये की मांग के बीच यह विवाद बना हुआ है. अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और किसान पक्ष के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है.

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Author: Vindhya Times

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