Rewa News: छुहिया घाटी की ऐतिहासिक शिकारगाह बदहाल, रीवा रियासत की धरोहर को बचाने की मांग

Rewa News: छुहिया घाटी की ऐतिहासिक शिकारगाह बदहाल, रीवा रियासत की धरोहर को बचाने की मांग

Rewa News: छुहिया घाटी की ऐतिहासिक शिकारगाह बदहाल, रीवा रियासत की धरोहर को बचाने की मांग

Rewa News: रीवा और सीधी जिले की सीमा पर स्थित छुहिया घाटी की ऐतिहासिक शिकारगाह अब बदहाल स्थिति में पहुंच रही है. रीवा रियासत के राजाओं से जुड़ी इस पुरानी कोठी के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों ने इस धरोहर के संरक्षण और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है.

रीवा रियासत के समय हुआ था निर्माण

जानकारों के अनुसार, पहाड़ी की ऊंचाई पर बनी इस इमारत का निर्माण रीवा रियासत के शासनकाल में कराया गया था. ऐतिहासिक जानकारी के मुताबिक, इसका निर्माण महाराज व्यंकट रमण सिंह जूदेव के समय शुरू हुआ था, जिसे बाद में महाराजा गुलाब सिंह जूदेव के शासनकाल में आगे बढ़ाया गया, ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से छुहिया घाटी, जंगल और आसपासय बीतने के साथ इस ऐतिहासिक भवन की स्थिति खराब होती चली गई. इसकी दीवारों और अंदरूनी हिस्सों में टूट-फूट के निशान दिखाई दे का पूरा क्षेत्र दूर तक दिखाई देता है. राजसी समय में इस स्थान का उपयोग शिकार, विश्राम और वन क्षेत्र की निगरानी के लिए किया जाता था.

राजाओं की यह कोठी वर्षों से रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी है।

भवन की हालत हुई खराब

समय बीतने के साथ इस ऐतिहासिक भवन की स्थिति खराब होती चली गई. इसकी दीवारों और अंदरूनी हिस्सों में टूट-फूट के निशान दिखाई दे रहे हैं. हालांकि पत्थरों से बनी इसकी मूल संरचना आज भी पुरानी वास्तुकला और मजबूती की पहचान कराती है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसका संरक्षण नहीं किया गया तो यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह खराब हो सकती है.

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

ग्रामीणों और इतिहास प्रेमियों ने मांग की है कि इस शिकारगाह का संरक्षण किया जाए और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए. उनका मानना है कि यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है.

वन विभाग कर रहा निगरानी

सीधी वन मंडल की डीएफओ प्रीती अहिरवार ने बताया कि यह शिकारगाह रीवा और सीधी जिले की सीमा पर स्थित करीब 150 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक इमारत है, उन्होंने कहा कि वन विभाग इसकी लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि कोई व्यक्ति इस ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान न पहुंचा सके. विभाग का प्रयास है कि भवन सुरक्षित रहे और इसकी पहचान आने वाली पीढ़ियों तक बनी रहे.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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