MP News: MP EOW की कार्यप्रणाली पर सवाल, 6 साल में 23 हजार से ज्यादा शिकायतें, लेकिन अदालत में सिर्फ 8 मामलों में चालान

MP News: MP EOW की कार्यप्रणाली पर सवाल, 6 साल में 23 हजार से ज्यादा शिकायतें, लेकिन अदालत में सिर्फ 8 मामलों में चालान

MP News: MP EOW की कार्यप्रणाली पर सवाल, 6 साल में 23 हजार से ज्यादा शिकायतें, लेकिन अदालत में सिर्फ 8 मामलों में चालान

MP News: मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार और आर्थिक अनियमितताओं की जांच करने वाली आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, यानी EOW, की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में है. विधानसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 से जून 2026 तक EOW को 23 हजार 261 शिकायतें प्राप्त हुईं. हालांकि, इनमें से अदालतों में चालान पेश होने वाले मामलों की संख्या केवल 8 बताई गई है, जिससे जांच की रफ्तार और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.

विधानसभा में सामने आए सरकारी आंकड़े

यह जानकारी कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग ने विधानसभा में दी. आंकड़ों के मुताबिक, प्राप्त 23 हजार 261 आवेदनों में से केवल 3 हजार 18 को प्रारंभिक जांच के बाद शिकायत के रूप में दर्ज किया गया, जबकि 756 आवेदन जांच के बाद नस्तीबद्ध, यानी फाइल बंद कर दिए गए.

लंबे समय तक लटकी रहीं जांचें

सरकारी आंकड़ों से यह भी सामने आया कि कई मामलों में शिकायत दर्ज होने से लेकर एफआईआर और फिर अदालत में चालान पेश करने तक वर्षों का समय लगा. कई प्रकरणों में जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया लंबी चलती रही, जिसके बाद ही न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए.

इन मामलों में पेश हुए चालान

EOW ने जिन प्रमुख मामलों में चालान पेश किए, उनमें इंदौर नगर निगम जल कार्य अनियमितता, सतना स्वास्थ्य एवं निर्माण कार्य प्रकरण, भोपाल शासकीय भूमि दस्तावेज मामला, जबलपुर विकास प्राधिकरण वित्तीय गड़बड़ी, ग्वालियर गृह निर्माण समिति धोखाधड़ी, भोपाल सहकारिता संस्था प्रकरण, उज्जैन निर्माण कार्य अनियमितता और रीवा नगर निगम से जुड़ा मामला शामिल हैं. इन मामलों में अलग-अलग समय पर जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए गए.

कुछ मामलों की जांच अब भी जारी

सरकारी जानकारी के अनुसार, कुछ चर्चित शिकायतें अब भी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया में हैं. इनमें स्वर्गीय महेश पांडे की शिकायत से जुड़ा मामला भी शामिल है, जिसमें बाद में पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने स्वयं को फरियादी के रूप में शामिल करने का आवेदन दिया था. यह प्रकरण फिलहाल जांचाधीन है, विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि हजारों शिकायतों के मुकाबले अदालत तक बहुत कम मामले क्यों पहुंचे. वहीं, सरकार का कहना है कि प्रत्येक शिकायत की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाती है. अब EOW की कार्यप्रणाली और जांच की गति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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