MP News: सतना के रत्नेंद्र सिंह ने विक्रम-1 मिशन में निभाई अहम भूमिका, देश के पहले निजी रॉकेट की सफलता में रहा बड़ा योगदान

MP News: सतना के रत्नेंद्र सिंह ने विक्रम-1 मिशन में निभाई अहम भूमिका, देश के पहले निजी रॉकेट की सफलता में रहा बड़ा योगदान

MP News: सतना के रत्नेंद्र सिंह ने विक्रम-1 मिशन में निभाई अहम भूमिका, देश के पहले निजी रॉकेट की सफलता में रहा बड़ा योगदान

MP News: मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा एयरोस्पेस इंजीनियर रत्नेंद्र सिंह ने देश के पहले निजी रॉकेट विक्रम-1 मिशन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर नया इतिहास रच दिया है. 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट की सफल लॉन्चिंग के साथ उनका वर्षों पुराना सपना भी साकार हो गया. इस उपलब्धि ने पूरे प्रदेश और जिले का गौरव बढ़ाया है.

रॉकेट की उड़ान से जुड़ी अहम जिम्मेदारी

रत्नेंद्र सिंह वर्ष 2022 से विक्रम-1 मिशन से जुड़े हुए थे. वे उस तकनीकी टीम का हिस्सा रहे, जिसने रॉकेट के गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल, यानी GNC, और फ्लाइट डायनेमिक्स सिस्टम पर काम किया. लॉन्चिंग के दौरान रॉकेट की दिशा, ऑर्बिट और उड़ान से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जिम्मेदारी इसी टीम के पास थी.

बचपन का सपना बना हकीकत

रत्नेंद्र बताते हैं कि बचपन में टीवी पर रॉकेट लॉन्चिंग देखने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ही काम करेंगे. भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से मिली प्रेरणा ने उनके इस संकल्प को और मजबूत किया. वर्षों की मेहनत और लगन के बाद अब उनका सपना साकार हुआ है.

IAS की राह छोड़ चुना अंतरिक्ष विज्ञान

रत्नेंद्र के पिता चाहते थे कि वे यूपीएससी की परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जाएं, लेकिन उन्होंने अपने बचपन के लक्ष्य को प्राथमिकता दी. उन्होंने रेलवे में इंजीनियर की नौकरी और निजी क्षेत्र के आकर्षक अवसर भी छोड़ दिए, ताकि अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें.

IIST से पढ़ाई, अब स्काईरूट एयरोस्पेस में इंजीनियर

भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुवनंतपुरम से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में एमटेक करने के बाद रत्नेंद्र सिंह को स्काईरूट एयरोस्पेस में काम करने का अवसर मिला. वर्तमान में वे गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल और फ्लाइट डायनेमिक्स इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं. उनका कहना है कि युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है.

कोठरा गांव से अंतरिक्ष तक का सफर

सतना जिले के कोठरा गांव से निकलकर अंतरिक्ष मिशन तक पहुंचने वाले रत्नेंद्र सिंह आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. उनके पिता पुष्पेंद्र सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, जबकि माता ऋतु सिंह गृहिणी हैं. विक्रम-1 मिशन की सफलता ने न केवल भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नई पहचान दी है, बल्कि सतना के इस युवा इंजीनियर को पूरे प्रदेश के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक भी बना दिया है.

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Author: Vindhya Times

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