Lifestyle: रामायण काल से जुड़ा है कद्दू का इतिहास, जानिए इसे सीताफल, काशीफल और कूष्माण्ड कहे जाने के पीछे की दिलचस्प पौराणिक वजहें

Lifestyle: रामायण काल से जुड़ा है कद्दू का इतिहास, जानिए इसे सीताफल, काशीफल और कूष्माण्ड कहे जाने के पीछे की दिलचस्प पौराणिक वजहें

Lifestyle: रामायण काल से जुड़ा है कद्दू का इतिहास, जानिए इसे सीताफल, काशीफल और कूष्माण्ड कहे जाने के पीछे की दिलचस्प पौराणिक वजहें

Lifestyle: भारतीय रसोई में पाई जाने वाली कद्दू एक ऐसी सब्जी है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नामों से जाना जाता है. कहीं इसे कुम्हड़ा, कोहड़ा या कद्दू कहा जाता है, तो कहीं संस्कृत में इसे कूष्माण्ड और आम बोलचाल में सीताफल या काशीफल के नाम से पहचाना जाता है. इन विविध नामों के पीछे प्राचीन धार्मिक कथाएं और वैज्ञानिक तर्क छिपे हुए हैं.

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रामायण काल और ठंडी तासीर का कनेक्शन

कद्दू को ‘सीताफल’ कहे जाने के पीछे पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हैं. कहा जाता है कि 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान श्री राम माता सीता के लिए कद्दू लेकर आते थे. एक अन्य कथा के अनुसार रावण द्वारा हरण के बाद माता सीता के आंसुओं से यह फल उपजा था. वहीं इसका एक तर्क ‘शीतफल’ (ठंडी तासीर वाला फल) भी है, जो समय के साथ बदलकर सीताफल बन गया.

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धार्मिक अनुष्ठानों और पवित्रता से जुड़ा है ‘काशीफल‘ नाम

कद्दू का काशी शहर से कोई सीधा भौगोलिक संबंध नहीं है, लेकिन हिंदू धार्मिक परंपराओं से इसका गहरा नाता है. सनातन धर्म में काशी को मोक्ष और वेदों का पवित्र केंद्र माना जाता है. पूजा-पाठ, श्राद्ध कर्म और धार्मिक भंडारों में कद्दू की सब्जी बनाना अत्यंत शुभ माना गया है, इसी पवित्रता के कारण इसे ‘काशीफल’ की संज्ञा दी गई.

मां कूष्माण्डा से जुड़ा संस्कृत नाम

संस्कृत में कद्दू को ‘कूष्माण्ड’ कहा जाता है. नवरात्र में पूजी जाने वाली मां दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम ‘मां कूष्माण्डा’ है, जिन्होंने अपने ईषत् हास्य से इस ब्रह्मांड की रचना की थी. कद्दू का गोल आकार ब्रह्मांड जैसा दिखाई देने के कारण इसे कूष्माण्ड कहा गया, और यही वजह है कि नवरात्र के दौरान मां कूष्माण्डा को कद्दू का विशेष भोग अर्पित किया जाता है.

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Author: Vindhya Times

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