MP News: मध्यप्रदेश विधानसभा में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण पर उठे सवाल, कांग्रेस ने जांच की मांग की

MP News: मध्यप्रदेश विधानसभा में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण पर उठे सवाल, कांग्रेस ने जांच की मांग की

MP News: मध्यप्रदेश विधानसभा में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण पर उठे सवाल, कांग्रेस ने जांच की मांग की

MP News: मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया. कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने सरकार पर फीस तय करने की प्रक्रिया में मनमानी और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि हजारों संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं और इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए.

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फीस निर्धारण प्रक्रिया पर उठे सवाल

विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति ने वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच 5,062 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित की है. सरकार के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट आवेदन मिलने के बाद अधिकतम 15 दिनों में दस्तावेजों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट समिति को सौंपता है, जिसके आधार पर फीस तय की जाती है.

एक बैठक में 355 संस्थानों की फीस तय होने पर सवाल

कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 में समिति ने एक ही बैठक में 355 निजी शिक्षण संस्थानों की फीस तय कर दी. उनका कहना है कि किसी भी संस्थान की आय-व्यय, बैलेंस शीट, निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किए बिना इतने बड़े स्तर पर एक दिन में निर्णय लेना व्यावहारिक नहीं लगता.

चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट पर भी सवाल

उपाध्याय ने कहा कि सरकार ने यह तो बताया कि रिपोर्ट 15 दिन के भीतर तैयार होती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कितने दिनों में कितने संस्थानों के आवेदन जांचे. उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों से अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण भी लिया जाना चाहिए, इसलिए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं.

नर्सिंग कॉलेजों का भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस विधायक ने नर्सिंग कॉलेजों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हर वर्ष 60 से 100 नर्सिंग संस्थानों की फीस निर्धारित की जाती है. उन्होंने सवाल किया कि जिन संस्थानों पर पहले से नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं, उनके मामलों में निरीक्षण दल और चार्टर्ड अकाउंटेंट ने किस आधार पर रिपोर्ट तैयार की, पंकज उपाध्याय ने निजी शिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारण प्रक्रिया की CBI या किसी उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर मुनाफाखोरी पर रोक लगनी चाहिए और समान पाठ्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश में एक समान शुल्क व्यवस्था लागू करने पर सरकार को विचार करना चाहिए.

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Vindhya Times
Author: Vindhya Times

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