शारदीय नवरात्रि 2026: कलश स्थापना में नारियल का महत्व, त्रिदेवों का आशीर्वाद और नारियल रखने की सही विधि
शारदीय नवरात्रि 2026: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत में नारियल (श्रीफल) का इस्तेमाल करना बेहद अनिवार्य माना गया है. विशेषकर शारदीय नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना में नारियल रखना एक सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कलश पर नारियल स्थापित करने से ही दैवीय शक्तियों का आह्वान होता है और घर में मां दुर्गा का आगमन व स्थायी वास होता है.

भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और ‘श्रीफल‘ की पौराणिक कथा
शास्त्रों में नारियल को ‘श्रीफल’ कहा गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – देवी लक्ष्मी का प्रिय फल. धार्मिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर प्रकट हुए थे, तब वे अपने साथ तीन अमूल्य संपदाएं लाए थे, जिनमें पहली माता लक्ष्मी थीं, दूसरी कामधेनु गाय और तीसरा नारियल का वृक्ष था. इसी कारण नारियल को भगवान विष्णु और धन की देवी लक्ष्मी का सबसे प्रिय फल माना जाता है और हर शुभ काम में इसका प्रयोग होता है.

नारियल में तीनों देवताओं का वास
पुराणों के अनुसार, नारियल एक मात्र ऐसा फल है जिसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना गया है. नवरात्रि में जब कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है, तो यह घर-परिवार पर एक साथ तीनों देवताओं के दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक बनता है. इसके अलावा, नारियल के ऊपरी हिस्से पर बनी तीन काली बिंदियों या छिद्रों को भगवान शिव की तीन आंखों (त्रिनेत्र) का स्वरूप मानकर पूजा जाता है.

गुरु बृहस्पति से संबंध और सुख-समृद्धि का कारक
ज्योतिष शास्त्र में नारियल का सीधा संबंध ग्रहों के गुरु ‘बृहस्पति’ से माना गया है. पूजा और घटस्थापना में नारियल का उपयोग करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और घर-परिवार में सुख, समृद्धि व ज्ञान का विस्तार होता है. गुरु को खुशहाली और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए नवरात्रि के पावन दिनों में कलश पर नारियल रखने से घर में धन-धान्य और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
कलश पर नारियल रखने की सही शास्त्रीय विधि
नवरात्रि में घटस्थापना करते समय नारियल रखने के सही नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. कलश के ऊपर नारियल रखते समय उसकी ‘आंखों’ (मुख) वाला हिस्सा हमेशा पूजा करने वाले साधक के मुख की तरफ होना चाहिए. नारियल पर लाल कलावा (मौली) बांधकर और आम के 5 पत्ते लगाकर ही इसे कलश पर स्थापित करें. इसके साथ ही, खाली कलश में जल के साथ एक सिक्का और अक्षत डालना न भूलें, जिससे पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके.
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Author: Vindhya Times
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