CG News: महानदी जल समझौते पर दिल्ली में महामंथन, अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों की बैठक
CG News: नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच वर्षों पुराने महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी आमने-सामने चर्चा करेंगे. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों के बीच पानी के न्यायसंगत बंटवारे और दीर्घकालिक जल प्रबंधन के लिए एक साझा सहमति बनाना है. दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी भी इस बातचीत का हिस्सा बनेंगे.
महानदी अंतरराज्यीय विवाद का मुख्य कारण
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी को लेकर तनाव का मामला साल 2018 से ‘महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण’ के समक्ष लंबित है. ओडिशा सरकार का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बनाए गए बैराजों और जल परियोजनाओं के कारण गैर-मानसून सीजन में ओडिशा में नदी का बहाव प्रभावित होता है. इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ का रुख रहा है कि वह केवल अपने निर्धारित हिस्से के पानी का इस्तेमाल कर रहा है और उसकी परियोजनाएं राज्य की कृषि व औद्योगिक जरूरतों के लिए आवश्यक हैं.
हालिया बैठकों और आपसी संवाद से बनी उम्मीद
इस जटिल मुद्दे को हल करने के लिए हाल के दिनों में दोनों राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद की प्रक्रिया तेज हुई है. इससे पहले 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में दोनों मुख्यमंत्रियों ने बातचीत की थी, जहां आपसी तकनीकी समन्वय पर जोर दिया गया. इसके अतिरिक्त, 20 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने बयान दिया था कि दोनों राज्यों के ऐतिहासिक और सामाजिक संबंधों के बल पर इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है.

बाढ़ नियंत्रण और आधुनिक जल प्रबंधन पर ध्यान
हालिया मानसूनी बारिश के कारण महानदी बेसिन के कई क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने इस बैठक के एजेंडे में जल प्रबंधन के पहलू को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है. बैठक में सिर्फ पानी के वितरण पर ही नहीं, बल्कि मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी के संचयन और बाढ़ नियंत्रण के उपायों पर भी विस्तृत रणनीति बनने की संभावना है. दिल्ली के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री इस अवसर पर अपने राज्य के जल अधिकारों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा करेंगे.
अर्थव्यवस्था और जनजीवन की जीवनरेखा
महानदी का पानी छत्तीसगढ़ और ओडिशा, दोनों ही राज्यों की कृषि, पेयजल आपूर्ति, पनबिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत अनिवार्य है. इसे छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा माना जाता है, जबकि ओडिशा के एक बड़े हिस्से की आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह इसी नदी पर टिकी हैं. यही वजह है कि ट्रिब्यूनल का अंतिम फैसला या राजनीतिक स्तर पर होने वाला कोई भी समझौता न केवल कानूनी दृष्टिकोण से, बल्कि दोनों प्रदेशों के सामाजिक और आर्थिक भविष्य के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होगा.
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Author: Vindhya Times
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