Rewa News: रीवा TRS कॉलेज में जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को हटाने का विवाद गहराया, प्रभारी प्राचार्य और HOD के खिलाफ जांच के निर्देश

Rewa News: रीवा TRS कॉलेज में जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को हटाने का विवाद गहराया, प्रभारी प्राचार्य और HOD के खिलाफ जांच के निर्देश

Rewa News: रीवा TRS कॉलेज में जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को हटाने का विवाद गहराया, प्रभारी प्राचार्य और HOD के खिलाफ जांच के निर्देश

Rewa News: रीवा के प्रतिष्ठित शासकीय ठाकुर रणमत सिंह (TRS) कॉलेज में जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को सेवा से पृथक करने का मामला अब गरमा गया है. मामले की विस्तृत जांच के बाद रीवा कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी और राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. गायत्री मिश्रा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कलेक्टर ने दोनों के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Inquiry) की औपचारिक अनुशंसा करते हुए रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेज दी है.

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अतिथि विद्वानों ने दर्ज कराई शिकायत

यह पूरा विवाद राजनीति विज्ञान विभाग के जनभागीदारी अतिथि विद्वानों को अचानक नौकरी से निकाले जाने के बाद शुरू हुआ. प्रभावित अतिथि विद्वानों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें बिना किसी वाजिब और ठोस कारण के सेवामुक्त कर दिया गया है. मामले की गंभीरता और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने तत्काल एक जांच टीम का गठन कर पूरे प्रकरण की पड़ताल के आदेश दिए थे.

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कॉलेज ने बताए 400, जांच में निकले 603 विद्यार्थी

जांच प्रक्रिया के दौरान महाविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए तर्कों की पोल खुल गई. कॉलेज प्रबंधन ने पहले दावा किया था कि राजनीति विज्ञान में छात्रों की संख्या केवल 400 है और इसीलिए अतिरिक्त अतिथि विद्वानों की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, प्रशासनिक जांच टीम की पड़ताल में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या 603 पाई गई. छात्रों की इतनी बड़ी संख्या सामने आने के बाद कॉलेज प्रबंधन का कार्यभार कम होने का तर्क पूरी तरह खारिज हो गया.

जांच में सहयोग न करने पर माना गया गंभीर अपराध

जांच रिपोर्ट में यह बात भी प्रमुखता से रेखांकित की गई है कि प्रभारी प्राचार्य और विभागाध्यक्ष ने उच्च अधिकारियों द्वारा मांगी गई जानकारियां समय पर उपलब्ध नहीं कराईं. इसके अलावा जांच टीम को अपेक्षित सहयोग न देने, भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत करने, वास्तविक तथ्यों को छिपाने और प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना करने को बेहद गंभीर लापरवाही तथा घोर प्रशासनिक अनियमितता माना गया है.

उच्च शिक्षा विभाग करेगा अंतिम कार्रवाई

कलेक्टर की अनुशंसा के बाद अब इस पूरे मामले में अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई भोपाल स्थित उच्च शिक्षा विभाग के स्तर से की जाएगी. वहीं दूसरी ओर, सेवा से हटाए गए अतिथि विद्वान शिवानंद मिश्रा ने अपना दर्द व्यक्त करते हुए कहा कि उनके साथ सरासर अन्याय हुआ है. उन्होंने मांग की है कि कॉलेज के 600 से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य और पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए प्रभावित विद्वानों की सेवाएं तुरंत बहाल की जानी चाहिए.

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Author: Vindhya Times

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