MP News: मध्यप्रदेश में बढ़ते कर्ज पर सरकार ने जारी की सफाई, कहा- ‘लाड़ली बहना या वेतन के लिए नहीं

MP News: मध्यप्रदेश में बढ़ते कर्ज पर सरकार ने जारी की सफाई, कहा- 'लाड़ली बहना या वेतन के लिए नहीं

MP News: मध्यप्रदेश में बढ़ते कर्ज पर सरकार ने जारी की सफाई, कहा- ‘लाड़ली बहना या वेतन के लिए नहीं

MP News: मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बार-बार कर्ज लेने को लेकर उठ रहे राजनीतिक और प्रशासनिक सवालों के बीच राज्य सरकार ने रविवार को एक विस्तृत प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से लिया जा रहा कर्ज किसी भी प्रकार के दैनिक राजस्व खर्च के लिए नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे और बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग किया जा रहा है.

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‘लाड़ली बहना‘ या वेतन के लिए नहीं लिया जा रहा कर्ज

सरकार ने साफ किया कि ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं या कर्मचारियों के वेतन जैसे नियमित खर्चों के लिए अलग से कर्ज नहीं लिया जाता. आरबीआई से मिलने वाले इस ऋण का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के तहत सड़क, एक्सप्रेस-वे, सिंचाई, बांध, नहर, बिजली, मेडिकल कॉलेज और स्कूल-कॉलेज जैसी अधोसंरचना परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में किया जा रहा है.

87 हजार करोड़ की सीमा में से लिया 37,400 करोड़

वित्तीय वर्ष 2026-27 के आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के लिए कुल ऋण सीमा लगभग 87,000 करोड़ रुपये तय की गई है. सितंबर 2026 तक इसमें से 37,400 करोड़ रुपये का ऋण लिया जा चुका है, जबकि सीमा के भीतर अभी 49,600 करोड़ रुपये की गुंजाइश बाकी है. मार्च 2027 तक विकास कार्यों की आवश्यकतानुसार और कर्ज लिया जाएगा.

1 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च का लक्ष्य

प्रेस नोट के मुताबिक, सरकार इस वित्तीय वर्ष में अपनी राजस्व आय और आरबीआई ऋण के माध्यम से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर खर्च करेगी. इसमें केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल जैसी महत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजनाएं, नए मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय विस्तार कार्य शामिल हैं. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विकास कोष के लिए जनता पर कोई असामान्य टैक्स नहीं बढ़ाया गया है.

‘वित्तीय स्थिति पूरी तरह सुरक्षित’

ऋण चुकाने की अपनी क्षमता पर बात करते हुए सरकार ने दावा किया कि मध्यप्रदेश ने कभी भी अपने कर्ज भुगतान में डिफॉल्ट नहीं किया है. राज्य का ‘Debt to GSDP Ratio’ 32.53 प्रतिशत है, जो निर्धारित मानकों के अनुकूल है. वहीं, ब्याज भुगतान और राजस्व प्राप्तियों का अनुपात 10 से 11 प्रतिशत के सुरक्षित स्तर पर बना हुआ है, जो राज्य के मजबूत वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है.

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Author: Vindhya Times

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